कविता :
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शब्दचित्रे

लेखन
व. पु. काळे
¤ स्वप्न ¤ एकाकी
¤ गगनभरारी
¤ आयुश्याचा ग्रंथ

पु. ल. देशपांडे

¤ माझे पौश्टीक जीवन  ¤ असामी असा मी ¤ म्हैस ¤ अंतू बर्वा ¤ रावसाहेब

 

Marathi



 

मानसीचा चित्रकार तो तुझे निरंतर चित्र काढतो
 

मानसीचा चित्रकार तो
तुझे निरंतर चित्र काढतो

भेट पहिली अपुली घडता
निळी मोहीनी नयनी हसता
उडे पापणी किंचित ढळता
गोड कपोली रंग उषेचे भरतो

ममस्पर्शाने तुझी मुग्धता
होत बोलकी तुला न कळता
माझ्याविण ही तुझी चारुता
मावळतीचे सूर्यफूल ते करतो

तुझ्या परी तव प्रीतीसरीता
संगम देखून मागे फिरता
हसरी संध्या रजनी होता
नक्षत्रांचा निळा चांदवा झरतो

 

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