कविता :
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गंभीर
इतर
चारोळ्या
प्रेमकाव्य
विडंबन

शब्दचित्रे

लेखन
व. पु. काळे
¤ स्वप्न ¤ एकाकी
¤ गगनभरारी
¤ आयुश्याचा ग्रंथ

पु. ल. देशपांडे

¤ माझे पौश्टीक जीवन  ¤ असामी असा मी ¤ म्हैस ¤ अंतू बर्वा ¤ रावसाहेब

Marathi

रान सरले, जपुन आता
माणसांचा गाव आहे

झापडे डोळ्यांस लावा
धाव मग भरधाव आहे!

हारलेले डाव सारे
खेळण्याचा आव आहे

हे नको तेही नको मज
ही विलक्षण हाव आहे

शुष्क पाचोळा नसे हा
वादळाचा घाव आहे

- पुलस्ति

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